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निबंध लेखन :“ समय और लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करती”


Essay on Value of Time

“ समय और लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करती”


समय निरंतर प्रवाहित जलधारा के समान है। समय जिसकी सत्ता पर पीछे मुड़कर देखना हैं ही नहीं वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करता| यह प्रकृति की ऐसी व्यूह रचना है जिससे कोई नहीं बच सकता, जिसको भेद सके ऐसे कोई योद्धा जन्म ही नहीं लिया है|


प्रकृति स्वयं समय है, हवा समय पर बहती ,पानी अपने समय पर बरसता, सूरज अपने समय पर उगता और डूबता, नवजात शिशु अपने समय होने पर बड़ा होता, पृथ्वी अपनी धुरी पर समय के अनुसार घूमती है| यदि इनमें से समय थोड़ा भी इधर उधर हो तो इस ईश्वर के साम्राज्य का अस्तित्व खतरे पर आ जाए|


सब कुछ समय के साथ होना चाहिए| समय के विरुद्ध जो जाता, उसे हानि ही वरण करती है| जो व्यक्ति समय के साथ नहीं चलता पग पग मिलाकर वह अपने पद पर स्थिर हो जाता है| संसार का नियम ही है परिवर्तन, बदलाव से ही सृष्टि का अस्तित्व सुरक्षित है, जिस प्रकार जलधारा के स्थिर हो जाने पर उस जल में अनेकों गंदगीयो जन्म लेती है उसी प्रकार मानव के समय अनुसार ना चलने व स्थिर हो जाने पर उसे विभिन्न अवगुणों व अनेकों प्रकार के अंधकार घेर लेते हैं|


ऋतु परिवर्तन, वर्ष परिवर्तन व युग परिवर्तन प्रकृति का इशारा है इस ओर की परिवर्तन ही है संसार में विकास के सृजन का कारण और परिवर्तन होता है समय के अनुसार अर्थात समय के सदुपयोग से ही व्यक्ति को सफलता प्राप्त होती है| सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर उस लहरों की भांति चलना पड़ता है, जो किसी के बोलने पर भी नहीं रुकती कठोर परिश्रम करना पड़ता है, व अपने सफलता के बराबर मुश्किलों को पार करना पड़ता है|


समय इस संसार में सबसे ज्यादा बलवान है, गहरे से गहरे मन व तन का घाव समय रुपी औषधि से ठीक हो जाता है| समय-समय की बात है दीन भी लाखों करोड़ों का मालिक बन जाता है, व लाखों करोड़ों का मालिक एक दीन से कम नहीं रह जाता| एक समय का त्रेता युग में जब कौरव वंशी

दुर्योधन ने अपनी भाभी, अर्थात एक सामग्री ध्रुपद कन्या यग्यसैनी ध्रोपती का चीर हरण करने का प्रयास किया और एक समय वह था जब पांडवों ने धर्म युद्ध महाभारत के चलते उसी प्राणी तुच्छ दुर्योधन को ना केवल दंड दिया व नारी की उपेक्षा के लिए ईश्वर के द्वार का रास्ता दिखाया|


समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता, आज जीवन है कल नहीं, व्यक्ति के कल की गलती को याद रखके आज गुस्सा करता इंसान, कल वह व्यक्ति ही ना रहा तो अपने ह्रदय में स्वयं को माफ उसे माफ ना करने के लिए क्या वह क्रोधित व्यक्ति कर पाएगा| समय रहते संभाल लेना चाहिए रिश्ते, समय रहते बीता लेना चाहिए अपनों के साथ हर पल, समय रहते मांग लेनी चाहिए माफी, समय रहते कर देना चाहिए माफ, समय रहते खोल देना चाहिए अपना ह्रदय का द्वार, समय रहते मान जाना चाहिए, समय रहते अपनों को मना लेना चाहिए, समय रहते जी लेना चाहिए मन भर के इस ईश्वर के वरदान को, क्या पता कल आपके पास समय ही ना हो| अर्थात अपना जीवन जी भर कर जीलें अपने स्वप्नपूरे कर लें, वह समय है! स्वयं की भी नहीं सुनता!

-मौसमी नामदेव

N.B.:-All rights are reserved to Mausmi Namdeo according to Copy Right Act 1957 under Chhattisgarh High Court, Bilaspur Jurisdiction.

Background Credit:-Unsplash@Kelly Sikkema

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